प्रेम पुजा है, उपासना है प्रेम, जगत का आधार ओर स्रस्टि का मुल है प्रेम, जीवो का प्राण ओर जीवन का सार है प्रेम, इसप्रेम के कारण सर्व शक्तिमान प्रभु भी भक्त के वश मे हो जाते है , प्रेम से ही प्रभु भक्तो के दास हो जाते है, मे तो हु भक्तन को दास, भक्त मेरे ...
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